सोच का अंतर

अभी कुछ दिनों पहले हमारे whatsapp group में एक शायरी आई जो इस प्रकार थी

“इंसान को अपनी नज़र में सही होना चाहिए

वरना दुनिया तो भगवान से भी दुखी है।”

ये शायरी सुनने में जितनी अच्छी लगी इतनी ही ज्यादा मैंने इसके बारे मे सोचा। असल मे ये हमारे दैनिक बोलचाल में बार बार आने लगी… तो मैंने इसपे ज़रा ध्यान दिया

अगर सभी अपनी नज़र में सही हो जाए तो? प्रश्न साधारण हैं लेकिन ये किसी की सोच बदल भी सकता है। अगर सभी अपनी खुद की नज़रों में सही है तो गलत कोन होगा। और इससे गलत काम करने वालो को रोकने की बात कोन करेगा

अगर सभी अपनी अपनी नज़र में सही हैं तो वो बलात्कारी आदमी भी गलत नही करता है.. क्योंकि उसे ये लगता है सभी लड़कियां बदचलन है या लड़कियां इस्तेमाल की चीज़ है। इसी तरह वो आतंकवादी भी अपनी नज़र मे सही है क्यूंकि उन्हें ये पता है। के इससे उन्हें जन्नत मिलेगी और यह अच्छा काम है। अब मैं अपना प्रश्न दोहराता हु “क्या सभी को अपनी नज़र में सही हो जाना चाहिए?”

मेरा मानना यह है। के इंसान की फितरत होती है वो हर काम करने के बाद उसके परिणाम से खुद के लिए कहानियां बना कर खुद को संतुष्ट कर लेता है। यहां एक दृटिकोण का अंतर आ जाता है।

अगर आपके किसी काम के लिए कोई टोक दे तो हम अड़ कर बात टाल देते है। हमे यहाँ बात को सुनने की जरूरत हैं। अपना तर्क देते हुए इस पर बात करनी चाहिए उससे ही जो आपको टोक रहा है। और हां आप गलत हो ये मुमकिन है। तो आप बहस की वजय बात करे ।

मैं खुद से विचार करके काम करता हु। मैं कुछ बातों को खुद से पूछ लेता हूं जिसमे मुझे कुछ पल भी नही लगते है। वो कुछ बातें ये हैं:-

– क्या इससे किसी का नुकसान हो रहा है?

-क्या इससे बेहतर कुछ हो सकता है?

-क्या ये करना जरूरी है?

-अगर ये ना किया जाए तो क्या होगा?

-ये काम कर लेने के बाद मुझे अपना सर या अपनी आवाज नीची तो नही करनी पड़ेगी (self-respect)?

मैं एक स्वभिमानी इंसान हु। और कभी अपनी वजह से अपना या किसी का सर नीचा नही करवाना चाहता हु। ये कुछ पल की खुद से बात कोई बड़ा बदलाव तो नही ला सकती लेकिन इतना जरूर है। शायद ये आपको कल से बेहतर इंसान बनने में मदद जरूर करेंगी।

और हाँ मैं यहाँ गलत भी हो सकता हु.. मेरी सोच गलत हो तो आपकी राय का स्वागत है। ☺️

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One thought on “सोच का अंतर

  1. बहुत अच्छा लिखा है सर
    har insaan ki apni apni soach hoti he or uske anusar hi wah decision leta hai
    mare मानना hai ki kisi bhi decision lene se pahle uske negative or positive effect ko analysis kare
    or agar decision ke baad hume positive result aate he to hume wah decision len chahiye others wise nahi.
    or yah effect moral values and ethics ke according hone chahiye.

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