Opposite side of the Coin

मुझे इसीलिए भी ये दुनिया अच्छी नहीं लगतीं

अखबारों मे अच्छी से ज्यादा बुरी खबरें पड़ता हु

मै समाज के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करता हूँ

जो समय पर अपने बिजली बिल भर देता है

लेकिन उसका एक दिन का भी बिल माफ नहीं होता

जो समय पर अपना टेक्स भरता हैं

किन्तु उसे इसमे छूट नहीं मिलती

जिसे हर जगह सामान्य बोल कर अलग कर दिया जाता हैं

किंतु मै इस असामान्य व्यवहार के लिये शिकायत नहीं करता

जिसने कभी किसी को उनकी जाति से नहीं पारखा

किंतु उसे हर वक़्त उसकी जाति देख कर पुनः प्रयास को केह दिया जाता है

जो अपना वोट वक़्त पर देता है

किंतु उसकी भलाई के लिये कोई कानून नहीं बनता

जो बहन बेटियों के आरोपियों को कानून को सोप देता है

किंतु कानून उन्हे सालों तक बिरयानी खिलाता है

जो कानून के रखवालों पे भरोसा करता हैं

किंतु कानून भूखमरी में चंद पैसों मे बिक जाता हैं

जो अपने निजी मामलों में कानून हाथ में नहीं लेता है

किंतु कानून सालों का वक़्त और पैसा लेकर उन्हे इस काम का इनाम देता है

*अगर किसी को फायदा सिर्फ इसलिए दिया जा रहा है के उनके पूर्वजों पर अत्याचार हुए हैं?

तो महिलाओ को उनका हक लौटाने में हमारी पीढ़ीया गुजर जाएंगी…….

*अगर पिछड़ापन फायदा पहुचाने की वजह है तो जाति को क्यू देखा जाता है?

*अगर आर्थिक नजरिए से देखा जा रहा है तो बंगले मे रहने वाला इसका लाभ क्यू ले रहे है?

*अब जो इसकी वजह से पीछे हो रहे है क्या वो भी ऐसा ही करें?

*इस लाभ को कितने वक़्त तक ऑर दिया जाएगा?

*जिनको इससे लाभ मिल चुका है क्या उन्हे अब सूची से अलग कर देना नहीं चाहिए क्या?

*एक दूसरी तरफ खडे हो कर समाज का हिस्सा बनने के लिए ये कैसी चाल है?

*अगर ये ऐसा ही चलता रहे तो क्या हमे इस भेदभाव को करते रहना चाहिए?

*यह निरंतर लाभ मानसिक हताशता ऑर विकलांगता को पैदा नहीं कर रहा हैं?

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